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पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित जैन समाज ने की सम्मेदशिखर तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र की सूची में हटाये जाने की मांग,

पूर्व केंद्रीय मंत्री सहित जैन समाज ने की सम्मेदशिखर तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र की सूची में हटाये जाने की मांग,

हर्ष शर्मा संवाददाता झांसी

जैन समाज के लोगों ने भारत सरकार की पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य के नेतृत्व में सम्मेदशिखर तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र की सूची में शामिल करने का भारी विरोध किया। दिगम्बर जैन समाज द्वारा एक विशाल जुलूस निकाला जहां जैन समाज के लोगो ने एक साथ में सम्मेदशिखर तीर्थ को पर्यटन क्षेत्र की सूची में हटाये जाने की मांग करते हुये प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौपा।

शनिवार को दिगंबर जैन महासमिति संभागीय झांसी और श्री दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य और सदर बाजार की पूनम जैन, प्रफुल जैन के नेतृत्व में सेंकड़ों जैन समाज के लोग, जैन धर्मावलंबियो द्वारा भारी संख्या में हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए। सभी रानी महल और सदर बाजार से पैदल मार्च कर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए बताया की पारसनाथ पर्वत राज को वन्य जीव अभ्यारण पर्यावरण पर्यटन के लिए घोषित इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत जोनल मास्टर प्लान व पर्यटन मास्टर प्लान / धार्मिक सूची से बाहर किया जाए। बिना जैन समाज की सहमति के जारी अधिसूचना 2795 ई 2=8=2019 को अविलंब रद्द किया जाए। पारसनाथ पर्वत राज और मधुवन को मास मदिरा बिक्री मुक्त पवित्र जैन तीर्थ स्थल घोषित किया जाए। समाज की पूनम जैन ने बताया गया कि झारंखड के गिरिडीह जिले में स्थित सम्मेद शिखर की पहाड़ी से जैन धर्म के 24 तीर्थकरों में से 20 तीर्थकर ओर अनेक साधु संत इस पहाड़ से मोक्ष पाय है। यह पहाड़ जैन धर्म के अुनयायी सम्मेद शिखर के नाम से जानते है। इसे अपना सबसे बड़ा तीर्थ मानते है और पूरे वर्ष भर देश विदेश के जैन अनुयायी हजारों की संख्या में यहा पहुंचकर धार्मिक क्रियाएं सम्ंपन्न कर अपने को धन्य मानते है। अगर यह पर्यटन स्थल घोषित हो जाता है। तो इसमें हजारों की संख्या में लोग आकर मांसाहार, नशे आदि का भी सेवन करेंगे, जिससे इस पविख स्थल की पवित्रता खत्म हो जायेगी। इस विरोध प्रदर्शन में जैन समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी शामिल हुए और जैन समाज की मांगों का समर्थन किया।

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