सैफ़ई हॉस्पिटल का पुराना माफिया ठेकेदार दबंगई के बल पर दे रहा है धमकियां।

मनोज कुमार वर्मा संवाददाता सैफई मैनपुरी

 

पुराना माफिया ठेकेदार दबंगई के बल पर दे रहा है धमकियां

  • सैफ़ई हॉस्पिटल का पुराना माफिया ठेकेदार दबंगई के बल पर दे रहा है धमकियां

सैफई- यूपी मेडिकल यूनिवर्सिटी में पिछले 13 वर्षों से सफाई का कार्य करने वाली फर्म साबरीन चौधरी का ठेका 31 मार्च20 को खत्म कर दिया गया है और ई टेंडर के माध्यम से नई फर्म ने विश्वविद्यालय में सफाई का कार्य एक अप्रैल से शुरू करा दिया है, लेकिन पिछले 13 वर्षों से सुर्खियों में रहने वाली फर्म साबरीन चौधरी की दबंगई आई सामने, टेंडर खत्म होने के बाद भी चिकित्सा विश्वविद्यालय से नहीं हटा है। अपनी हठ धर्मी, दबंगई के साथ कर्मचारियों से करा रहा काम जिससे सैफ़ई हॉस्पिटल में अराजकता की स्थिति बन सकती है। इस मामले पर बातचीत के दौरान कुलपति प्रोफेसर डाक्टर राजकुमार ने कहा कि सफाई ठेकेदार लगातार धमकियां और कर्मचारियों को भड़का रहा है। दबंगई के साथ विश्वविद्यालय में कर्मचारियों की ले रहा हाजिरी। हमने इसकी शिकायत सैफ़ई पुलिस को करा दी,इससे पूर्व की एफ आई आर पर भी जानकारी ली है अभी तक क्या कार्रवाई की गई है।

फर्म साबरीन चौधरी का ठेका 31 मार्च20 को खत्म कर दिया गया

विश्वविद्यालय द्वारा फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया।

कुलपति प्रोफेसर डाक्टर राजकुमार ने कहा है कि साबरीन चौधरी फर्म पर कर्मचारियों का ईपीएफ एक करोड़ 54 लाख रुपये का गबन का आरोप लगने के बाद फर्म को ब्लैक लिस्ट कर सैफई थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी गई थी। उस समय सफाई फर्म के प्रोपराइटर सिराज चौधरी कोर्ट से स्टे आर्डर ले आए। उसमें यह आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय ने फर्म का पक्ष नहीं सुना और ब्लैक लिस्ट कर दिया। जबकि विश्वविद्यालय द्वारा स्टे होने के बाद तीन बार पक्ष सुना गया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब ना मिलने पर विश्वविद्यालय द्वारा फर्म को ब्लैक लिस्ट किया गया।
नया टेंडर होने के बाद में सिराज चौधरी द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग से स्टे आर्डर लाया गया है जबकि पिछड़ा वर्ग आयोग ने विश्वविद्यालय को बगैर सुने ही एक तरफा ऑर्डर दे दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को जवाब दे दिया गया है।
पूरी तरह से सारे नियम कानून के तहत नया टेंडर किया गया है।
मालूम हो कुलपति प्रोफेसर डाक्टर राजकुमार ने सैफई में चार्ज लेने के बाद में ही बहुत सारे बदलाव किए थे। जिससे वर्षो से जमे माफियाओं में खलबली मच गई थी। आए दिन धमकियां भी कुलपति को देते रहे लेकिन कुलपति ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार अपने कार्य में बदलाव लाते रहे। यहां तक कि विश्वविद्यालय के कुछ माफिया तंत्र फैकल्टी में भ्रष्टाचार में सम्मिलित है। जो आए दिन कुलपति को साजिशों के तहत बदनाम करने के प्रयास में रहते हैं ।लेकिन कई के खिलाफ जांच कार्रवाई हो चुकी लेकिन आज सैफई क्षेत्र में यह चर्चा का विषय है कि सैफ़ई विश्वविद्यालय में एक ऑफिसर ने 13 साल से जमे माफिया को हटा दिया है।

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